धूप_अर्मा_कला_समय
Reimagining Sensuality: A Photographer's Perspective on Modern Feminine Aesthetics
जब लेंस पर चाय का स्वाद? मॉडल्स तो बस स्क्रीन पर घूम रही हैं… पर हम तो कुछ दिखाते हैं! कल्पट्रिक स्टेज़ में ‘क्रिएटिव’ का मतलब? पहले कभी ‘वॉग’ में होता है — अब ‘चाय’ में होता है।
एक सरी के झुरझुरे में पड़ी ‘फोटोग्राफी’… अपनी ‘शैडो’ के साथ… अपने ‘एमोशन’ के साथ… और ‘आई’… खुद… कि ‘यह’… ‘में’? 🤔
कमेंट सेक्शन में— “चाय पीकर बतखा!”
The Light That Forgot to Smile: A Quiet Moment in Maldives with Red Bikini and Shadows
चाँदनी में बिकिनी? हे भगवान!
जब सब कुछ पर कैमरा चला रहा है… पर कोई स्माइल नहीं करता! 🤫
ये वो ‘फोटोग्राफ़’ हैं जो ‘अटेंशन’ के लिए नहीं — ‘स्पिल्ड कॉफ़ी’ के सपने के लिए है। 4AM पर मालदीव में, समुद्र का प्रतिबिम्ब… साधु-सी स्वभाव!
क्या पतले में ‘शैडो’ है? 😅
कल्पट्रोन (एक) ‘एल्गोरिदम’? ‘बेट’, ‘वाइप’, ‘हॉइज़’ — सबकुछ #FFB6C1!
अगर आप भी एक शॉट हुए…
तो Comment Section में #खड़ाई!
Remember the Moment When Beauty Struck You Like Sunlight on Bare Skin?
जब दुनिया स्क्रीन ब्रश कर रही होती है… वो तो सिर्फ़ सूरफ आइलैंड पर खड़े पानी के किनारे पर बैठी हुई है। कोई मॉडल नहीं, कोई स्टूडियो लाइट्स नहीं — सिर्फ़ एक महिला, समुद्र के किनारे पर, पतली साड़ी में सुनहरी धूप में।
क्या कभी सोचा? ‘फोटोग्राफी’ = ‘सेल्फ-एक्सपोजर’?
अगर ‘ब्यूटि’ हमेशन में ‘लाउड’ होता — तो ‘सनलाइट’ कभी ‘बेअर स्किन’ पर ‘किस्ड’ हुआ?
अब… वह कभी ‘प्रेटेंड’ करती है?
नहीं।
वह खुद को ‘देखती’ है।
और हम?
कमेंट्र में ‘ओपन’! 😌
Personal na pagpapakilala
मैं दिल्ली की एक आँख हूँ, जो चाँदनी में समय को पकड़ती है। मेरी कैमरा सिर्फ चेहरे नहीं, बल्कि उनके सपनों को कैद करती है। हर तस्वीर में एक सुगंध, हर पलक में एक सच्चाई। मुझे सिर्फ़ सुंदरता पसंद है —— प्राकृतिक, पवित्र, प्राचीन। कोई मुझे 'ब्यूटिफुल' कहता है? मैं सिर्फ़ 'अभिमान' कहती हूँ।



