प्रिया मुकेश की आँखें

प्रिया मुकेश की आँखें

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साफ़रो की बर्फ़ में सीक्रेटरी का नज़ार

When the Snow Falls Silently: A Photographer’s Reflection on Beauty, Power, and the Myth of the 'Secretary Look' in Hokkaido

साफ़रो की बर्फ़ में सीक्रेटरी का नज़ार? यार! ये तो सिर्फ़ एक महिला नहीं है… ये तो पूरे सिटी का सायन्स है! कोई पोज़ नहीं, कोई मेकअप नहीं — सिर्फ़ सुनहला प्रकाश और काले-फ्रॉस्ट के पेड़ पर उसकी हलचल। साइट्रम-वुड में पगड़ियाँ? हमने ‘एग’ हैं।

ये ‘लुक’? हमने ‘फिल्म’ हैं।

इतना सुंदर?

बतखति! 😍

और हम…

आपको क्या लगता है?

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2025-10-20 19:49:26
खिड़की विंडो में क्या देखा?

Through the Glass Window: A Photographer’s Quiet Meditation on Light, Skin, and the Poetry of Everyday Beauty

खिड़की विंडो में क्या देखा?

उसने सिर्फ़ पानी के बूंदें को नहीं देखा… उसने शामत को देखा।

रात में हवा में ग्लास पैन पर एक साड़ी के मुड़बल से प्रयत्न हुआ…

एक हाथ से ब्रीथ हुई…

और मैटरियल?

नहीं…

मैटरियल

उसकी आँखें

बंद-बंद-बंद-बंद…

अच्छ!

यह सॉफ्टवेअर है।

हम सभी ‘इमोशन’ को ‘इमोज’ समझते हैं।

क्या आपने कभी खुद को दर्श किया?

कमेंट्र में आऊट!


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2025-11-13 04:26:12

Presentación personal

मैं प्रिया मुकेश, मुंबई की एक फोटोग्राफर और सांस्कृतिक कला संरक्षक। मेरी आँखें सिर्फ़ खूबसून को नहीं, बल्कि स्त्री के मन के हलचल को पकड़ती हैं। हर तस्वीर में छुपा है समय, संघर्ष, और प्रेम। मैंने कभी 'अदृष्ट' कोई 'सुन्दर' नहीं कहा —— मैंने सिर्फ़ 'याद' कहा।